Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.61.1-3: वैशम्पायन कहते हैं - जनमेजय! जब महाबली वसुदेवनन्दन भगवान श्रीकृष्ण अपने पिता को महाभारत युद्ध का वृत्तांत सुना रहे थे, तब उन्होंने जान-बूझकर अभिमन्यु वध का वृत्तांत बीच में ही छोड़ दिया। परम बुद्धिमान और वीर श्रीकृष्ण ने सोचा कि कहीं मेरे पिता अपने पौत्र की मृत्यु का अशुभ समाचार सुनकर शोक से व्याकुल न हो जाएँ। वे व्याकुल हो जाएँ। इसीलिए उन्होंने वह वृत्तांत नहीं सुनाया। 1-3। | mahabharat अध्याय 14.61: श्रीकृष्णका सुभद्राके कहनेसे वसुदेवजीको अभिमन्युवधका वृत्तान्त सुनाना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन कहते हैं - जनमेजय! जब महाबली वसुदेवनन्दन भगवान श्रीकृष्ण अपने पिता को महाभारत युद्ध का वृत्तांत सुना रहे थे, तब उन्होंने जान-बूझकर अभिमन्यु वध का वृत्तांत बीच में ही छोड़ दिया। परम बुद्धिमान और वीर श्रीकृष्ण ने सोचा कि कहीं मेरे पिता अपने पौत्र की मृत्यु का अशुभ समाचार सुनकर शोक से व्याकुल न हो जाएँ। वे व्याकुल हो जाएँ। इसीलिए उन्होंने वह वृत्तांत नहीं सुनाया। 1-3।
Vaishampayana says - Janamejaya! When the mighty Vasudevanandan Lord Krishna was narrating the story of the Mahabharata war to his father, he deliberately left out the story of Abhimanyu's killing in the middle of the story. The most intelligent and brave Krishna thought that his father might get upset with grief on hearing the inauspicious news of his grandson's death. He might get upset. That is why he did not narrate that episode. 1-3.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥