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mahabharat 14.60.23: पांडवों के कई वाहन नष्ट हो चुके थे। उनमें भी युद्ध के प्रति सारा उत्साह समाप्त हो चुका था। फिर भी, वे शेष बची एक अक्षौहिणी सेना से घिरे युधिष्ठिर को लेकर शल्य का सामना करने के लिए आगे बढ़े।   |   mahabharat अध्याय 14.60: वसुदेवजीके पूछनेपर श्रीकृष्णका उन्हें महाभारत-युद्धका वृत्तान्त संक्षेपसे सुनाना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.60.23 
हतवाहनभूयिष्ठा: पाण्डवाऽपि युधिष्ठिरम्।
अक्षौहिण्या निरुत्साहा: शिष्टया पर्यवारयन्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
पांडवों के कई वाहन नष्ट हो चुके थे। उनमें भी युद्ध के प्रति सारा उत्साह समाप्त हो चुका था। फिर भी, वे शेष बची एक अक्षौहिणी सेना से घिरे युधिष्ठिर को लेकर शल्य का सामना करने के लिए आगे बढ़े।
 
Many of the Pandavas' vehicles were destroyed. They too had lost all enthusiasm for war. Still, they advanced ahead to face Shalya, carrying Yudhishthira surrounded by the remaining one Akshauhini army.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)