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श्लोक 14.6.26  |
स चेत् त्वामनुयुञ्जीत ममानुगमनेप्सया।
शंसेथा वह्निमारूढं मामपि त्वमशङ्कया॥ २६॥ |
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| अनुवाद |
| यदि वह आपसे मेरा पता पूछे ताकि वह मेरे पास आ सके, तो आप निर्भय होकर उससे कह दें कि 'नारद अग्नि में अंतर्धान हो गये हैं।' |
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| If he asks you for my address so that he can come to me, then you should fearlessly tell him that 'Narada has disappeared into the fire.' 26. |
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