श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 6: नारदजीकी आज्ञासे मरुत्तका उनकी बतायी हुई युक्तिके अनुसार संवर्तसे भेंट करना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  14.6.26 
स चेत् त्वामनुयुञ्जीत ममानुगमनेप्सया।
शंसेथा वह्निमारूढं मामपि त्वमशङ्कया॥ २६॥
 
 
अनुवाद
यदि वह आपसे मेरा पता पूछे ताकि वह मेरे पास आ सके, तो आप निर्भय होकर उससे कह दें कि 'नारद अग्नि में अंतर्धान हो गये हैं।'
 
If he asks you for my address so that he can come to me, then you should fearlessly tell him that 'Narada has disappeared into the fire.' 26.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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