श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 6: नारदजीकी आज्ञासे मरुत्तका उनकी बतायी हुई युक्तिके अनुसार संवर्तसे भेंट करना  »  श्लोक 18-19
 
 
श्लोक  14.6.18-19 
नारद उवाच
राजन्नङ्गिरस: पुत्र: संवर्तो नाम धार्मिक:।
चङ्क्रमीति दिश: सर्वा दिग्वासा मोहयन् प्रजा:॥ १८॥
तं गच्छ यदि याज्यं त्वां न वाञ्छति बृहस्पति:।
प्रसन्नस्त्वां महातेजा: संवर्तो याजयिष्यति॥ १९॥
 
 
अनुवाद
नारदजी बोले- राजन! अंगिरा का दूसरा पुत्र संवर्त बड़ा ही धर्मात्मा है। वह नंगा होकर सब दिशाओं में घूमता रहता है, लोगों को भ्रमित करता है, अर्थात् सबसे छिपकर रहता है। यदि बृहस्पति तुम्हें अपना यजमान नहीं बनाना चाहते, तो तुम संवर्त के पास जाओ। संवर्त बड़ा ही तेजस्वी है, वह प्रसन्नतापूर्वक तुम्हारा यज्ञ सम्पन्न करेगा॥ 18-19॥
 
Naradji said- King! Angira's second son Samvarta is very religious. Being naked, he keeps roaming in all directions, misleading the people, i.e., hiding from everyone. If Brihaspati does not want to make you his Yajman, then you should go to Samvarta. Samvarta is very illustrious, he will happily perform your Yajna.॥ 18-19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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