Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.58.8: जो राजा ब्राह्मणों के विरुद्ध जाता है, वह न तो इस लोक में सुखपूर्वक रह सकता है और न परलोक में सुख प्राप्त कर सकता है। यही मेरे इस गहन संदेश का अर्थ है ॥8॥ | mahabharat अध्याय 14.58: कुण्डल लेकर उत्तंकका लौटना, मार्गमें उन कुण्डलोंका अपहरण होना तथा इन्द्र और अग्निदेवकी कृपासे फिर उन्हें पाकर गुरुपत्नीको देना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न हि राज्ञा विशेषेण विरुद्धेन द्विजातिभि:।
शक्यं हि लोके स्थातुं वै प्रेत्य वा सुखमेधितुम्॥ ८॥
अनुवाद
जो राजा ब्राह्मणों के विरुद्ध जाता है, वह न तो इस लोक में सुखपूर्वक रह सकता है और न परलोक में सुख प्राप्त कर सकता है। यही मेरे इस गहन संदेश का अर्थ है ॥8॥
Any king who goes against the Brahmins in particular can neither live peacefully in this world nor find happiness in the next. This is the meaning of my profound message. ॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥