Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.58.59: जनमेजय! द्विजश्रेष्ठ उत्तंक ने वासुकि आदि नागों के यहाँ जो कुछ हुआ था, उसका सम्पूर्ण समाचार अपने गुरु महर्षि गौतम को सुनाया॥59॥ | mahabharat अध्याय 14.58: कुण्डल लेकर उत्तंकका लौटना, मार्गमें उन कुण्डलोंका अपहरण होना तथा इन्द्र और अग्निदेवकी कृपासे फिर उन्हें पाकर गुरुपत्नीको देना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वासुकिप्रमुखानां च नागानां जनमेजय।
सर्वं शशंस गुरवे यथावद् द्विजसत्तम:॥ ५९॥
अनुवाद
जनमेजय! द्विजश्रेष्ठ उत्तंक ने वासुकि आदि नागों के यहाँ जो कुछ हुआ था, उसका सम्पूर्ण समाचार अपने गुरु महर्षि गौतम को सुनाया॥59॥
Janamejaya! Uttanka, the best of the dwijs, narrated the entire news of the incident that had happened at the place of Vasuki and other serpents to his guru Maharishi Gautam. 59॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥