Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.58.48: अग्निदेव के ऐसा कहने पर उत्तंक ने उनकी आज्ञा का पालन किया। तब घृतमयी अर्चि के अग्निदेव प्रसन्न होकर नागलोक को जलाने की इच्छा से कुपित हो उठे ॥48॥ | mahabharat अध्याय 14.58: कुण्डल लेकर उत्तंकका लौटना, मार्गमें उन कुण्डलोंका अपहरण होना तथा इन्द्र और अग्निदेवकी कृपासे फिर उन्हें पाकर गुरुपत्नीको देना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अग्निदेव के ऐसा कहने पर उत्तंक ने उनकी आज्ञा का पालन किया। तब घृतमयी अर्चि के अग्निदेव प्रसन्न होकर नागलोक को जलाने की इच्छा से कुपित हो उठे ॥48॥
When Agnidev said this, Uttanka obeyed his orders. Then the Agnidev of Ghritmayi Archi became pleased and became enraged with the desire to burn the world of Nagas. 48॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥