श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 58: कुण्डल लेकर उत्तंकका लौटना, मार्गमें उन कुण्डलोंका अपहरण होना तथा इन्द्र और अग्निदेवकी कृपासे फिर उन्हें पाकर गुरुपत्नीको देना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  14.58.38 
प्राकारनिचयैर्दिव्यैर्मणिमुक्तास्वलंकृतै:।
उपपन्नं महाभाग शातकुम्भमयैस्तथा॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
हे महान्! इसके चारों ओर सोने की ईंटों से बनी दिव्य दीवारें हैं, जो बहुमूल्य पत्थरों और मोतियों से सजी हुई हैं।
 
O great one! All around it are divine walls made of bricks of gold and decorated with precious stones and pearls.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)