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mahabharat 14.58.3: राजा के ऐसा कहने पर उत्तंक रानी के पास गए और उनके पति की कही हुई बात को हूबहू दोहराया। अपने स्वामी की बात सुनकर रानी मदयन्ती ने तुरन्त ही अपने बहुमूल्य कुण्डल ऋषि उत्तंक को दे दिए।   |   mahabharat अध्याय 14.58: कुण्डल लेकर उत्तंकका लौटना, मार्गमें उन कुण्डलोंका अपहरण होना तथा इन्द्र और अग्निदेवकी कृपासे फिर उन्हें पाकर गुरुपत्नीको देना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 58: कुण्डल लेकर उत्तंकका लौटना, मार्गमें उन कुण्डलोंका अपहरण होना तथा इन्द्र और अग्निदेवकी कृपासे फिर उन्हें पाकर गुरुपत्नीको देना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  14.58.3 
इत्युक्तस्तामुत्तङ्कस्तु भर्तुर्वाक्यमथाब्रवीत्।
श्रुत्वा च सा तदा प्रादात् ततस्ते मणिकुण्डले॥ ३॥
 
 
अनुवाद
राजा के ऐसा कहने पर उत्तंक रानी के पास गए और उनके पति की कही हुई बात को हूबहू दोहराया। अपने स्वामी की बात सुनकर रानी मदयन्ती ने तुरन्त ही अपने बहुमूल्य कुण्डल ऋषि उत्तंक को दे दिए।
 
When the king said this, Uttanka went to the queen and repeated what her husband had said verbatim. Queen Madayanti, on hearing her master's words, immediately gave her precious earrings to sage Uttanka.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)