Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 14.58.24-26h: जब बंधन टूटा और काला मृगचर्म ज़मीन पर गिरा, तो एक सर्प ने उसे देखा। वह ऐरावत वंश में उत्पन्न तक्षक था। उसने मृगचर्म के अंदर रखे हुए रत्नमय कुण्डलों को देखा। फिर वह उन कुण्डलों को अपने दाँतों में दबाए हुए तेज़ी से एक छेद में घुस गया।   |   mahabharat अध्याय 14.58: कुण्डल लेकर उत्तंकका लौटना, मार्गमें उन कुण्डलोंका अपहरण होना तथा इन्द्र और अग्निदेवकी कृपासे फिर उन्हें पाकर गुरुपत्नीको देना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 58: कुण्डल लेकर उत्तंकका लौटना, मार्गमें उन कुण्डलोंका अपहरण होना तथा इन्द्र और अग्निदेवकी कृपासे फिर उन्हें पाकर गुरुपत्नीको देना  »  श्लोक 24-26h
 
 
श्लोक  14.58.24-26h 
विशीर्णबन्धने तस्मिन् गते कृष्णाजिने महीम्॥ २४॥
अपश्यद् भुजग: कश्चित् ते तत्र मणिकुण्डले।
ऐरावतकुलोद्भूत: शीघ्रो भूत्वा तदा हि स:॥ २५॥
विदश्यास्येन वल्मीकं विवेशाथ स कुण्डले।
 
 
अनुवाद
जब बंधन टूटा और काला मृगचर्म ज़मीन पर गिरा, तो एक सर्प ने उसे देखा। वह ऐरावत वंश में उत्पन्न तक्षक था। उसने मृगचर्म के अंदर रखे हुए रत्नमय कुण्डलों को देखा। फिर वह उन कुण्डलों को अपने दाँतों में दबाए हुए तेज़ी से एक छेद में घुस गया।
 
When the bondage was broken and the black deerskin fell on the ground, a serpent saw it. He was Takshak born in the clan of Airavat. He saw the precious stone earrings kept inside the deerskin. Then he quickly entered a hole holding those earrings in his teeth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)