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सौदास उवाच
न चैवैषा गति: क्षेम्या न चान्या विद्यते गति:।
एतन्मे मतमाज्ञाय प्रयच्छ मणिकुण्डले॥ २॥
अनुवाद
सौदास ने कहा, 'हे प्रिये! मैं जिस स्थिति में हूँ, वह मेरे लिए ठीक नहीं है और इसके अलावा कोई दूसरा उपाय भी नहीं है। मेरे विचार जानकर, अपनी दोनों कीमती कुण्डलियाँ इस ब्राह्मण को दे दो।'
Saudasa said, 'My dear! The condition in which I am in is not good for me and there is no other way except this. Knowing my thoughts, give your two precious earrings to this Brahmin.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥