Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 14.58.17: वैशम्पायन जी कहते हैं - 'हे जनमेजय! बुद्धिमान राजा सौदास के मुख से ऐसी उचित एवं हितकारी बातें सुनकर, उनकी अनुमति लेकर मुनि उत्तंक अहिल्या की ओर चल पड़े।   |   mahabharat अध्याय 14.58: कुण्डल लेकर उत्तंकका लौटना, मार्गमें उन कुण्डलोंका अपहरण होना तथा इन्द्र और अग्निदेवकी कृपासे फिर उन्हें पाकर गुरुपत्नीको देना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 58: कुण्डल लेकर उत्तंकका लौटना, मार्गमें उन कुण्डलोंका अपहरण होना तथा इन्द्र और अग्निदेवकी कृपासे फिर उन्हें पाकर गुरुपत्नीको देना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  14.58.17 
वैशम्पायन उवाच
इत्युक्त: स तदा राज्ञा क्षमं बुद्धिमता हितम्।
अनुज्ञाप्य स राजानमहल्यां प्रतिजग्मिवान्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन जी कहते हैं - 'हे जनमेजय! बुद्धिमान राजा सौदास के मुख से ऐसी उचित एवं हितकारी बातें सुनकर, उनकी अनुमति लेकर मुनि उत्तंक अहिल्या की ओर चल पड़े।
 
Vaishmpayana says, 'O Janamejaya! Having heard such appropriate and beneficial words from the mouth of the wise king Saudasa, taking his permission the sage Uttank proceeded towards Ahalya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)