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श्री महाभारत
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पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
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अध्याय 58: कुण्डल लेकर उत्तंकका लौटना, मार्गमें उन कुण्डलोंका अपहरण होना तथा इन्द्र और अग्निदेवकी कृपासे फिर उन्हें पाकर गुरुपत्नीको देना
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श्लोक 16
श्लोक
14.58.16
एवं तव प्रपश्यामि श्रेयो भृगुकुलोद्वह।
आगच्छतो हि ते विप्र भवेन्मृत्युर्न संशय:॥ १६॥
अनुवाद
हे भृगुवंशी ब्राह्मण! मैं ऐसा करने में तुम्हारा कल्याण देखता हूँ। यदि तुम आओगे, तो मरोगे। इसमें कोई संदेह नहीं है।॥16॥
O Brahmin of the Bhrigu clan! I see your welfare in doing this. If you come, you will die. There is no doubt about this. ॥16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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