Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.58.11: सौदास ने कहा, "हे ब्राह्मण! आप जितने प्रश्न पूछना चाहें, पूछिए। मैं आपके प्रश्न का उत्तर दूंगा। आपके मन में जो भी शंकाएं हैं, मैं उन्हें तुरंत दूर कर दूंगा। मुझे इसके बारे में बिल्कुल भी सोचना नहीं पड़ेगा।" | mahabharat अध्याय 14.58: कुण्डल लेकर उत्तंकका लौटना, मार्गमें उन कुण्डलोंका अपहरण होना तथा इन्द्र और अग्निदेवकी कृपासे फिर उन्हें पाकर गुरुपत्नीको देना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सौदास उवाच
ब्रूहि विप्र यथाकामं प्रतिवक्तास्मि ते वच:।
छेत्तास्मि संशयं तेऽद्य न मेऽत्रास्ति विचारणा॥ ११॥
अनुवाद
सौदास ने कहा, "हे ब्राह्मण! आप जितने प्रश्न पूछना चाहें, पूछिए। मैं आपके प्रश्न का उत्तर दूंगा। आपके मन में जो भी शंकाएं हैं, मैं उन्हें तुरंत दूर कर दूंगा। मुझे इसके बारे में बिल्कुल भी सोचना नहीं पड़ेगा।"
Saudasa said, "O Brahmin! Ask as many questions as you wish. I will answer your question. Whatever doubts you have in your mind, I will clear them right away. I will not have to think about it at all."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥