Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.58.1: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! रानी मदयन्ती के वचन सुनकर उत्तंक ने राजा मित्रसह (सौदास) के पास जाकर उनसे परिचय मांगा। तब इक्ष्वाकुवंश में श्रेष्ठ उस राजा ने परिचय के रूप में रानी को यह संदेश दिया॥1॥ | mahabharat अध्याय 14.58: कुण्डल लेकर उत्तंकका लौटना, मार्गमें उन कुण्डलोंका अपहरण होना तथा इन्द्र और अग्निदेवकी कृपासे फिर उन्हें पाकर गुरुपत्नीको देना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन उवाच
स मित्रसहमासाद्य अभिज्ञानमयाचत।
तस्मै ददावभिज्ञानं स चेक्ष्वाकुवरस्तदा॥ १॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! रानी मदयन्ती के वचन सुनकर उत्तंक ने राजा मित्रसह (सौदास) के पास जाकर उनसे परिचय मांगा। तब इक्ष्वाकुवंश में श्रेष्ठ उस राजा ने परिचय के रूप में रानी को यह संदेश दिया॥1॥
Vaishampayana says- Janamejaya! On hearing the words of Queen Madayanti, Uttanka went to King Mitrasah (Saudas) and asked him for some identification. Then that king, the best among the Ikshwaku clan, gave the following message to be conveyed to the queen as identification.॥1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥