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mahabharat 14.57.9: हे शत्रुनाश करने वाले, हे राजन! मैं अपने गुरु का धन, जो आपके अधीन है, उन्हें अर्पण करके अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार पुनः आपका अधीन हो जाऊँगा॥ 9॥   |   mahabharat अध्याय 14.57: उत्तंकका सौदाससे उनकी रानीके कुण्डल माँगना और सौदासके कहनेसे रानी मदयन्तीके पास जाना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.57.9 
उपाहृत्य गुरोरर्थं त्वदायत्तमरिंदम।
समयेनेह राजेन्द्र पुनरेष्यामि ते वशम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुनाश करने वाले, हे राजन! मैं अपने गुरु का धन, जो आपके अधीन है, उन्हें अर्पण करके अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार पुनः आपका अधीन हो जाऊँगा॥ 9॥
 
O enemy-destroyer, O king! After offering the wealth of my Guru, which is under your control, to him, I shall once again become your subordinate, as per my pledge.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)