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mahabharat 14.57.6: उत्तंक ने कहा- महाराज! ऐसा ही हो, परन्तु मुझसे एक शर्त रखिए। मैं गुरुदक्षिणा लौटा दूँगा और फिर आपके अधीन हो जाऊँगा।   |   mahabharat अध्याय 14.57: उत्तंकका सौदाससे उनकी रानीके कुण्डल माँगना और सौदासके कहनेसे रानी मदयन्तीके पास जाना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.57.6 
उत्तङ्क उवाच
एवमस्तु महाराज समय: क्रियतां तु मे।
गुर्वर्थमभिनिर्वर्त्य पुनरेष्यामि ते वशम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
उत्तंक ने कहा- महाराज! ऐसा ही हो, परन्तु मुझसे एक शर्त रखिए। मैं गुरुदक्षिणा लौटा दूँगा और फिर आपके अधीन हो जाऊँगा।
 
Uttanka said- Maharaj! So be it, but make one condition with me. I will return the Gurudakshina and then come under your control.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)