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mahabharat 14.57.5: राजा ने कहा, "हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! मेरे लिए दिन के छठे भाग में भोजन निर्धारित किया गया है। यह वही समय है। मैं भूख से पीड़ित हूँ। इसीलिए आप मेरे हाथों से बच नहीं सकते।"   |   mahabharat अध्याय 14.57: उत्तंकका सौदाससे उनकी रानीके कुण्डल माँगना और सौदासके कहनेसे रानी मदयन्तीके पास जाना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 57: उत्तंकका सौदाससे उनकी रानीके कुण्डल माँगना और सौदासके कहनेसे रानी मदयन्तीके पास जाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  14.57.5 
राजोवाच
षष्ठे काले ममाहारो विहितो द्विजसत्तम।
न शक्यस्त्वं समुत्स्रष्टुं क्षुधितेन मयाद्य वै॥ ५॥
 
 
अनुवाद
राजा ने कहा, "हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! मेरे लिए दिन के छठे भाग में भोजन निर्धारित किया गया है। यह वही समय है। मैं भूख से पीड़ित हूँ। इसीलिए आप मेरे हाथों से बच नहीं सकते।"
 
The king said, "O great Brahmin! Food has been prescribed for me in the sixth part of the day. This is the same time. I am suffering from hunger. That is why you cannot escape from my hands.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)