Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.57.4: उत्तंक ने कहा, "हे राजन! आपको तो यह जानना ही होगा कि मैं गुरुदक्षिणा की खोज में भटकता हुआ यहाँ आया हूँ। बुद्धिमान पुरुष कहते हैं कि जो गुरुदक्षिणा लेने में परिश्रमी है, उसे कष्ट नहीं देना चाहिए।" | mahabharat अध्याय 14.57: उत्तंकका सौदाससे उनकी रानीके कुण्डल माँगना और सौदासके कहनेसे रानी मदयन्तीके पास जाना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उत्तङ्क उवाच
राजन् गुर्वर्थिनं विद्धि चरन्तं मामिहागतम्।
न च गुर्वर्थमुद्युक्तं हिंस्यमाहुर्मनीषिण:॥ ४॥
अनुवाद
उत्तंक ने कहा, "हे राजन! आपको तो यह जानना ही होगा कि मैं गुरुदक्षिणा की खोज में भटकता हुआ यहाँ आया हूँ। बुद्धिमान पुरुष कहते हैं कि जो गुरुदक्षिणा लेने में परिश्रमी है, उसे कष्ट नहीं देना चाहिए।"
Uttanka said, "O King! You must know that I have come here wandering around in search of Gurudakshina. Wise men say that one who is industrious in collecting Gurudakshina should not be harmed." 4.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥