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श्री महाभारत
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पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
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अध्याय 57: उत्तंकका सौदाससे उनकी रानीके कुण्डल माँगना और सौदासके कहनेसे रानी मदयन्तीके पास जाना
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श्लोक 26
श्लोक
14.57.26
एते ह्यामुच्य भगवन् क्षुत्पिपासाभयं कुत:।
विषाग्निश्वापदेभ्यश्च भयं जातु न विद्यते॥ २६॥
अनुवाद
हे प्रभु! इन्हें धारण करने पर भूख-प्यास का भय कहाँ रहता है? विष, अग्नि और जंगली पशुओं का भी भय नहीं रहता॥26॥
O Lord! When one wears these, where does one fear hunger and thirst? One is never afraid of poison, fire or even wild animals.॥ 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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