Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.57.24: हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! इन कुण्डलों के इन छिद्रों में खो जाने का भय सदैव बना रहता है। इन्हें केवल वही धारण कर सकता है जो देवताओं, दानवों और सर्पों से सावधान रहता है॥ 24॥ | mahabharat अध्याय 14.57: उत्तंकका सौदाससे उनकी रानीके कुण्डल माँगना और सौदासके कहनेसे रानी मदयन्तीके पास जाना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! इन कुण्डलों के इन छिद्रों में खो जाने का भय सदैव बना रहता है। इन्हें केवल वही धारण कर सकता है जो देवताओं, दानवों और सर्पों से सावधान रहता है॥ 24॥
‘O best of the Brahmins! There is always a danger of these earrings getting lost in these holes. Only he who is cautious of the gods, demons and serpents can wear them.॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥