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श्लोक  14.57.21 
एवमेतद् वद ब्रह्मन् नानृतं वदसेऽनघ।
अभिज्ञानं तु किंचित् त्वं समानयितुमर्हसि॥ २१॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण! तुम जो कह रहे हो वह ठीक है। अनघ! यद्यपि तुम झूठ नहीं बोलते, फिर भी तुम्हें इसका कोई प्रमाण लाना चाहिए कि तुम स्वयं महाराज का संदेश लेकर आये हो।
 
Brahman! What you are saying is correct. Anagh! Although you do not speak a lie, you should bring some proof that you have come from Maharaja himself with his message.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)