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mahabharat 14.57.2: उन्हें देखकर महाबली ब्राह्मण उत्तंक को तनिक भी घबराहट नहीं हुई। उन्हें देखकर यमराज के समान भयंकर महाबली राजा सौदास उठकर उनके पास गए और बोले -॥2॥   |   mahabharat अध्याय 14.57: उत्तंकका सौदाससे उनकी रानीके कुण्डल माँगना और सौदासके कहनेसे रानी मदयन्तीके पास जाना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 57: उत्तंकका सौदाससे उनकी रानीके कुण्डल माँगना और सौदासके कहनेसे रानी मदयन्तीके पास जाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  14.57.2 
चकार न व्यथां विप्रो राजा त्वेनमथाब्रवीत्।
प्रत्युत्थाय महातेजा भयकर्ता यमोपम:॥ २॥
 
 
अनुवाद
उन्हें देखकर महाबली ब्राह्मण उत्तंक को तनिक भी घबराहट नहीं हुई। उन्हें देखकर यमराज के समान भयंकर महाबली राजा सौदास उठकर उनके पास गए और बोले -॥2॥
 
On seeing them, the great Brahmin Uttanka did not feel nervous at all. On seeing them, the mighty King Saudasa, who was as fearsome as Yamaraja, stood up and went to them and said -॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)