श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 57: उत्तंकका सौदाससे उनकी रानीके कुण्डल माँगना और सौदासके कहनेसे रानी मदयन्तीके पास जाना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  14.57.17 
उत्तङ्क उवाच
क्व पत्नी भवत: शक्या मया द्रष्टुं नरेश्वर।
स्वयं वापि भवान् पत्नीं किमर्थं नोपसर्पति॥ १७॥
 
 
अनुवाद
उत्तंक ने कहा, "नरेश्वर! मैं आपकी पत्नी को कहाँ ढूँढ़ने जाऊँगा? मैं उसे कैसे देख पाऊँगा? आप स्वयं अपनी पत्नी के पास क्यों नहीं चले जाते?"
 
Uttanka said, "Nareshwar! Where will I go looking for your wife? How will I be able to see her? Why don't you go to your wife yourself?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)