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mahabharat 14.57.13: सौदास ने कहा, "ब्रह्मर्षि! वे बहुमूल्य कुण्डल तो मेरी रानी के ही योग्य हैं। सुव्रत! कोई और वस्तु मांगो, मैं तुम्हें अवश्य दूंगा।"   |   mahabharat अध्याय 14.57: उत्तंकका सौदाससे उनकी रानीके कुण्डल माँगना और सौदासके कहनेसे रानी मदयन्तीके पास जाना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.57.13 
सौदास उवाच
पत्न्यास्ते मम विप्रर्षे उचिते मणिकुण्डले।
वरयार्थं त्वमन्यं वै तं ते दास्यामि सुव्रत॥ १३॥
 
 
अनुवाद
सौदास ने कहा, "ब्रह्मर्षि! वे बहुमूल्य कुण्डल तो मेरी रानी के ही योग्य हैं। सुव्रत! कोई और वस्तु मांगो, मैं तुम्हें अवश्य दूंगा।"
 
Saudasa said, "Brahmarshi! Those precious earrings are worthy of my queen only. Suvrata! Ask for any other thing, I will surely give it to you." 13.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)