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mahabharat 14.57.1: वैशम्पायन कहते हैं - जनमेजय! राक्षस बनने के बाद राजा सौदास बहुत भयानक लग रहे थे। उनकी मूँछें और दाढ़ी बहुत लंबी थीं। वे मानव रक्त से सने हुए थे। 1.   |   mahabharat अध्याय 14.57: उत्तंकका सौदाससे उनकी रानीके कुण्डल माँगना और सौदासके कहनेसे रानी मदयन्तीके पास जाना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.57.1 
वैशम्पायन उवाच
स तं दृष्ट्वा तथाभूतं राजानं घोरदर्शनम्।
दीर्घश्मश्रुधरं नॄणां शोणितेन समुक्षितम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं - जनमेजय! राक्षस बनने के बाद राजा सौदास बहुत भयानक लग रहे थे। उनकी मूँछें और दाढ़ी बहुत लंबी थीं। वे मानव रक्त से सने हुए थे। 1.
 
Vaishampayana says- Janamejaya! King Saudas looked very fearsome after becoming a demon. His moustache and beard were very long. They were stained with human blood. 1.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)