Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.56.6: उन महर्षि ने अपने हजारों शिष्यों को शिक्षा देकर उन्हें घर जाने की अनुमति दे दी; किन्तु उत्तंक के प्रति अपने अत्यन्त प्रेम के कारण वे उसे घर जाने की अनुमति नहीं देना चाहते थे। हे प्रिये! धीरे-धीरे उन महामुनि उत्तंक की आयु वृद्धावस्था को प्राप्त हो गई। | mahabharat अध्याय 14.56: उत्तंककी गुरुभक्तिका वर्णन, गुरुपुत्रीके साथ उत्तंकका विवाह, गुरुपत्नीकी आज्ञासे दिव्यकुण्डल लानेके लिये उत्तंकका राजा सौदासके पास जाना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उन महर्षि ने अपने हजारों शिष्यों को शिक्षा देकर उन्हें घर जाने की अनुमति दे दी; किन्तु उत्तंक के प्रति अपने अत्यन्त प्रेम के कारण वे उसे घर जाने की अनुमति नहीं देना चाहते थे। हे प्रिये! धीरे-धीरे उन महामुनि उत्तंक की आयु वृद्धावस्था को प्राप्त हो गई।
That Maharishi, after teaching thousands of his disciples, gave them permission to go home; but due to his immense love for Uttanka, he did not want to give permission to him to go home. O dear! Gradually that great sage Uttanka attained old age.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥