Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 14.56.35: यह सुनकर गौतम ने अपनी पत्नी से कहा, ‘ठीक है, ऐसा ही हो।’ दूसरी ओर उत्तंक एक निर्जन वन में गए और राजा सौदास से मिले।   |   mahabharat अध्याय 14.56: उत्तंककी गुरुभक्तिका वर्णन, गुरुपुत्रीके साथ उत्तंकका विवाह, गुरुपत्नीकी आज्ञासे दिव्यकुण्डल लानेके लिये उत्तंकका राजा सौदासके पास जाना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 56: उत्तंककी गुरुभक्तिका वर्णन, गुरुपुत्रीके साथ उत्तंकका विवाह, गुरुपत्नीकी आज्ञासे दिव्यकुण्डल लानेके लिये उत्तंकका राजा सौदासके पास जाना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  14.56.35 
इत्युक्त: प्राह तां पत्नीमेवमस्त्विति गौतम:।
उत्तङ्कोऽपि वने शून्ये राजानं तं ददर्श ह॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर गौतम ने अपनी पत्नी से कहा, ‘ठीक है, ऐसा ही हो।’ दूसरी ओर उत्तंक एक निर्जन वन में गए और राजा सौदास से मिले।
 
On hearing this Gautama said to his wife, 'Okay, let it be so.' On the other hand Uttanka went to a deserted forest and met King Saudasa.
 
इति श्रीमहाभारते आश्वमेधिके पर्वणि अनुगीतापर्वणि उत्तङ्कोपाख्याने कुण्डलाहरणे षट्पञ्चाशत्तमोऽध्याय:॥ ५६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्वमेधिकपर्वके अन्तर्गत अनुगीतापर्वमें उत्तंकके उपाख्यानमें कुण्डलाहरणविषयक छप्पनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५६॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)