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mahabharat 14.56.34: अहिल्या बोलीं, "हे प्रभु! मुझे इसका ज्ञान नहीं था, इसीलिए मैंने उस ब्राह्मण को ऐसा कार्य सौंपा। मुझे विश्वास है कि आपकी कृपा से उसे वहाँ किसी प्रकार का भय नहीं रहेगा।" 34.   |   mahabharat अध्याय 14.56: उत्तंककी गुरुभक्तिका वर्णन, गुरुपुत्रीके साथ उत्तंकका विवाह, गुरुपत्नीकी आज्ञासे दिव्यकुण्डल लानेके लिये उत्तंकका राजा सौदासके पास जाना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 56: उत्तंककी गुरुभक्तिका वर्णन, गुरुपुत्रीके साथ उत्तंकका विवाह, गुरुपत्नीकी आज्ञासे दिव्यकुण्डल लानेके लिये उत्तंकका राजा सौदासके पास जाना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  14.56.34 
अहल्योवाच
अजानन्त्या नियुक्त: स भगवन् ब्राह्मणो मया।
भवत्प्रसादान्न भयं किंचित् तस्य भविष्यति॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
अहिल्या बोलीं, "हे प्रभु! मुझे इसका ज्ञान नहीं था, इसीलिए मैंने उस ब्राह्मण को ऐसा कार्य सौंपा। मुझे विश्वास है कि आपकी कृपा से उसे वहाँ किसी प्रकार का भय नहीं रहेगा।" 34.
 
Ahalya said, "O Lord! I was not aware of this, that is why I assigned such a task to that Brahmin. I am sure that by your grace he will not face any fear there." 34.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)