श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 56: उत्तंककी गुरुभक्तिका वर्णन, गुरुपुत्रीके साथ उत्तंकका विवाह, गुरुपत्नीकी आज्ञासे दिव्यकुण्डल लानेके लिये उत्तंकका राजा सौदासके पास जाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  14.56.20 
उत्तङ्क उवाच
गुर्वर्थं कं प्रयच्छामि ब्रूहि त्वं द्विजसत्तम।
तमुपाहृत्य गच्छेयमनुज्ञातस्त्वया विभो॥ २०॥
 
 
अनुवाद
उत्तंक ने पूछा - हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! प्रभु! मैं आपको गुरुदक्षिणा में क्या दूँ? कृपया बताइए। मैं उसे आपको देकर घर जाने की अनुमति ले लूँगा।
 
Uttanka asked - O best Brahmin! Lord! What should I give you as Gurudakshina? Please tell me. I will offer it to you and take your permission to go home.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)