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वैशम्पायन बोले, "जनमेजय! उत्तंक मुनि महान तपस्वी, तेजस्वी और अपने गुरु के परम भक्त थे। उन्होंने जीवन में अपने गुरु के अतिरिक्त किसी अन्य देवता की पूजा नहीं की।"
Vaishampayana said- Janamejaya! Uttank Muni was a great ascetic, brilliant and a great devotee of his Guru. He did not worship any other deity except his Guru in his life.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥