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mahabharat 14.56.19: भृगु नंदन! यदि आज तुम्हारी यहाँ से जाने की इच्छा हो, तो मेरी आज्ञा स्वीकार करो और यथाशीघ्र अपने घर लौट जाओ॥19॥   |   mahabharat अध्याय 14.56: उत्तंककी गुरुभक्तिका वर्णन, गुरुपुत्रीके साथ उत्तंकका विवाह, गुरुपत्नीकी आज्ञासे दिव्यकुण्डल लानेके लिये उत्तंकका राजा सौदासके पास जाना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 56: उत्तंककी गुरुभक्तिका वर्णन, गुरुपुत्रीके साथ उत्तंकका विवाह, गुरुपत्नीकी आज्ञासे दिव्यकुण्डल लानेके लिये उत्तंकका राजा सौदासके पास जाना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  14.56.19 
किं त्वद्य यदि ते श्रद्धा गमनं प्रति भार्गव।
अनुज्ञां प्रतिगृह्य त्वं स्वगृहान् गच्छ मा चिरम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
भृगु नंदन! यदि आज तुम्हारी यहाँ से जाने की इच्छा हो, तो मेरी आज्ञा स्वीकार करो और यथाशीघ्र अपने घर लौट जाओ॥19॥
 
Bhrigu Nandan! If today you have a desire to leave from here, then accept my orders and return to your home as soon as possible.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)