गौतम उवाच
त्वत्प्रीतियुक्तेन मया गुरुशुश्रूषया तव।
व्यतिक्रामन्महाकालो नावबुद्धो द्विजर्षभ॥ १८॥
अनुवाद
गौतम बोले, "हे ब्राह्मण! आपकी गुरु-सेवा के कारण मेरा आप पर बड़ा प्रेम हो गया था। इसीलिए इतना समय बीत जाने पर भी यह बात मेरे मन में नहीं आई।"
Gautama said, "O Brahmin! I had developed a great love for you because of your service to your Guru. That is why even after so much time has passed, this matter did not come to my mind." 18.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥