Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.56.10-11h: भरत! वह पहले से ही बोझ से दबा हुआ था और भूख ने भी उसे बेचैन कर दिया था। अतः अपनी यह दशा देखकर वह दुःखी स्वर में रोने लगा। | mahabharat अध्याय 14.56: उत्तंककी गुरुभक्तिका वर्णन, गुरुपुत्रीके साथ उत्तंकका विवाह, गुरुपत्नीकी आज्ञासे दिव्यकुण्डल लानेके लिये उत्तंकका राजा सौदासके पास जाना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत: स भारनिष्पिष्ट: क्षुधाविष्टश्च भारत॥ १०॥
दृष्ट्वा तां वयसोऽवस्थां रुरोदार्तस्वरस्तदा।
अनुवाद
भरत! वह पहले से ही बोझ से दबा हुआ था और भूख ने भी उसे बेचैन कर दिया था। अतः अपनी यह दशा देखकर वह दुःखी स्वर में रोने लगा।
Bhaarat! He was already crushed by the burden and hunger had also made him restless. So seeing his condition, he started crying in a sorrowful voice. 10 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥