श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 56: उत्तंककी गुरुभक्तिका वर्णन, गुरुपुत्रीके साथ उत्तंकका विवाह, गुरुपत्नीकी आज्ञासे दिव्यकुण्डल लानेके लिये उत्तंकका राजा सौदासके पास जाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  14.56.1 
जनमेजय उवाच
उत्तङ्क: केन तपसा संयुक्तो वै महामना:।
य: शापं दातुकामोऽभूद् विष्णवे प्रभविष्णवे॥ १॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय ने पूछा - ब्रह्मन्! महात्मा उत्तंक मुनि ने ऐसा कौन-सा तप किया था, जिसके कारण उन्होंने सबकी उत्पत्ति के कारण भगवान विष्णु को भी शाप देने का संकल्प किया?
 
Janamejaya asked – Brahman! What penance did Mahatma Uttank Muni do, due to which he resolved to curse even Lord Vishnu, who was the cause of the origin of all? 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)