vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
»
अध्याय 55: श्रीकृष्णका उत्तंक मुनिको विश्वरूपका दर्शन कराना और मरुदेशमें जल प्राप्त होनेका वरदान देना
»
श्लोक d5
श्लोक
14.55.d5
दयया दु:खमोहान्मां समुद्धर्तुमिहार्हसि।
कर्मभिर्बहुभि: पापैर्बद्धं पाहि जनार्दन॥ )
अनुवाद
जनार्दन! मुझ पर कृपा करें और मुझे दुःख देने वाले मोह से मुक्त करें। मैं अनेक पाप कर्मों से बंधा हुआ हूँ। कृपया मेरी रक्षा करें।
Janardan! Please be kind to me and free me from the delusions that cause misery. I am bound by many sinful deeds. Please protect me.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×