श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 55: श्रीकृष्णका उत्तंक मुनिको विश्वरूपका दर्शन कराना और मरुदेशमें जल प्राप्त होनेका वरदान देना  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  14.55.d1 
उत्तङ्क उवाच
(नमो नमस्ते सर्वात्मन् नारायण परात्पर।
परमात्मन् पद्मनाभ पुण्डरीकाक्ष माधव॥
 
 
अनुवाद
उत्तंक ने कहा- सर्वात्मन! परात्पर नारायण! आपको बारंबार नमस्कार. ईश्वर! पद्मनाभ! पुण्डरीकाक्ष! माधव! आप को बधाई।
 
Uttanka said-Sarvatman! Paratpar Narayan! Greetings to you again and again. God! Padmanabha! Pundarikaksh! Madhav! Greetings to you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)