श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 55: श्रीकृष्णका उत्तंक मुनिको विश्वरूपका दर्शन कराना और मरुदेशमें जल प्राप्त होनेका वरदान देना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  14.55.8 
द्यावापृथिव्योर्यन्मध्यं जठरेण तवावृतम्।
भुजाभ्यामावृताश्चाशास्त्वमिदं सर्वमच्युत॥ ८॥
 
 
अनुवाद
आकाश और पृथ्वी के बीच का क्षेत्र आपके उदर से व्याप्त है। आपकी भुजाओं ने समस्त दिशाओं को घेर रखा है। अच्युत! यह सम्पूर्ण दृश्यमान जगत् आप ही हैं।॥8॥
 
The area between the sky and the earth is pervading from your stomach. Your arms have surrounded all the directions. Achyuta! This entire visible world is you. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)