चिक्षेप च स तं धीमान् वाग्भिरुग्राभिरच्युतम्।
पुन: पुनश्च मातङ्ग: पिबस्वेति तमब्रवीत्॥ २०॥
अनुवाद
उस समय बुद्धिमान उत्तंक ने भी भगवान कृष्ण की कटु वाणी से निन्दा की। दूसरी ओर चाण्डाल ने उनसे बार-बार आग्रह किया- 'महर्षि! कृपया जल पीजिए।'
At that time the wise Uttanka also criticised Lord Krishna with his harsh words. On the other hand the Chandala repeatedly urged him- 'Maharishi! Please drink some water.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥