श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 55: श्रीकृष्णका उत्तंक मुनिको विश्वरूपका दर्शन कराना और मरुदेशमें जल प्राप्त होनेका वरदान देना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  14.55.20 
चिक्षेप च स तं धीमान् वाग्भिरुग्राभिरच्युतम्।
पुन: पुनश्च मातङ्ग: पिबस्वेति तमब्रवीत्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
उस समय बुद्धिमान उत्तंक ने भी भगवान कृष्ण की कटु वाणी से निन्दा की। दूसरी ओर चाण्डाल ने उनसे बार-बार आग्रह किया- 'महर्षि! कृपया जल पीजिए।'
 
At that time the wise Uttanka also criticised Lord Krishna with his harsh words. On the other hand the Chandala repeatedly urged him- 'Maharishi! Please drink some water.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)