श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 55: श्रीकृष्णका उत्तंक मुनिको विश्वरूपका दर्शन कराना और मरुदेशमें जल प्राप्त होनेका वरदान देना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  14.55.16 
ततो दिग्वाससं धीमान् मातङ्गं मलपङ्किनम्।
अपश्यत मरौ तस्मिन् श्वयूथपरिवारितम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
तभी उस मुनि ने उस मरुभूमि में एक नग्न चाण्डाल को देखा, जो कुत्तों के झुंड से घिरा हुआ था और जिसका शरीर मैल और कीचड़ से सना हुआ था॥16॥
 
Just then the wise sage saw in that desert a naked Chandala surrounded by a pack of dogs and his body was covered with filth and mud.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)