श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 54: भगवान‍् श्रीकृष्णका उत्तंकसे अध्यात्मतत्त्वका वर्णन करना तथा दुर्योधनके अपराधको कौरवोंके विनाशका कारण बतलाना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  14.54.7 
असच्च सदसच्चैव यद् विश्वं सदसत् परम्।
मत्त: परतरं नास्ति देवदेवात् सनातनात्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
उससे परे जो असत्, नित्य और अव्यक्त जगत् है, वह भी मुझ सनातन देवाधिदेव से पृथक नहीं है ॥7॥
 
The unreal, the eternal and the unmanifested world beyond that is also not separate from me, the eternal Devadhidev. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)