Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 14.54.6: मुनि! चारों आश्रमों में जो चार प्रकार के धर्म प्रसिद्ध हैं तथा वेदों में जितने भी कर्म कहे गए हैं, उन सबको तू मेरा ही स्वरूप जान॥6॥   |   mahabharat अध्याय 14.54: भगवान‍् श्रीकृष्णका उत्तंकसे अध्यात्मतत्त्वका वर्णन करना तथा दुर्योधनके अपराधको कौरवोंके विनाशका कारण बतलाना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 54: भगवान‍् श्रीकृष्णका उत्तंकसे अध्यात्मतत्त्वका वर्णन करना तथा दुर्योधनके अपराधको कौरवोंके विनाशका कारण बतलाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  14.54.6 
ये चाश्रमेषु वै धर्माश्चतुर्धा विदिता मुने।
वैदिकानि च सर्वाणि विद्धि सर्वं मदात्मकम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
मुनि! चारों आश्रमों में जो चार प्रकार के धर्म प्रसिद्ध हैं तथा वेदों में जितने भी कर्म कहे गए हैं, उन सबको तू मेरा ही स्वरूप जान॥6॥
 
Muni! The four types of Dharma which are famous in the four ashrams and all the deeds mentioned in the Vedas, consider them all as my form. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)