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mahabharat 14.54.3: सम्पूर्ण प्राणी मुझमें हैं और मैं सम्पूर्ण प्राणियों में स्थित हूँ। इसे तुम भली-भाँति समझ लो। इसमें तुम्हें कोई संदेह नहीं करना चाहिए॥3॥   |   mahabharat अध्याय 14.54: भगवान‍् श्रीकृष्णका उत्तंकसे अध्यात्मतत्त्वका वर्णन करना तथा दुर्योधनके अपराधको कौरवोंके विनाशका कारण बतलाना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 54: भगवान‍् श्रीकृष्णका उत्तंकसे अध्यात्मतत्त्वका वर्णन करना तथा दुर्योधनके अपराधको कौरवोंके विनाशका कारण बतलाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  14.54.3 
मयि सर्वाणि भूतानि सर्वभूतेषु चाप्यहम्।
स्थित इत्यभिजानीहि मा तेऽभूदत्र संशय:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
सम्पूर्ण प्राणी मुझमें हैं और मैं सम्पूर्ण प्राणियों में स्थित हूँ। इसे तुम भली-भाँति समझ लो। इसमें तुम्हें कोई संदेह नहीं करना चाहिए॥3॥
 
All beings are in me and I am present in all beings. You should understand this very well. You should not have any doubt in this.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)