Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.54.2: श्री कृष्ण बोले- हे ब्रह्मर्षि! आपको यह जानना चाहिए कि तमोगुण, रजोगुण और सत्त्वगुण- ये सभी भाव मुझ पर आश्रित हैं। आपको यह भी जानना चाहिए कि रुद्र और वसु भी मुझसे ही उत्पन्न होते हैं॥2॥ | mahabharat अध्याय 14.54: भगवान् श्रीकृष्णका उत्तंकसे अध्यात्मतत्त्वका वर्णन करना तथा दुर्योधनके अपराधको कौरवोंके विनाशका कारण बतलाना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वासुदेव उवाच
तमो रजश्च सत्त्वं च विद्धि भावान् मदाश्रयान्।
तथा रुद्रान् वसून् वापि विद्धि मत्प्रभवान् द्विज॥ २॥
अनुवाद
श्री कृष्ण बोले- हे ब्रह्मर्षि! आपको यह जानना चाहिए कि तमोगुण, रजोगुण और सत्त्वगुण- ये सभी भाव मुझ पर आश्रित हैं। आपको यह भी जानना चाहिए कि रुद्र और वसु भी मुझसे ही उत्पन्न होते हैं॥2॥
Shri Krishna said- O Brahmarshi! You should know that Tamoguna, Rajoguna and Sattvaguna- all these emotions are dependent on me. You should also know that Rudras and Vasus are also born from me.॥2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥