Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.54.18: भृगुवंश को सुख देने वाले महर्षि! जब मैं गंधर्वयोनि में प्रकट होता हूँ, तब मेरे समस्त आचरण और विचार गंधर्वों के समान होते हैं, इसमें संशय नहीं है। | mahabharat अध्याय 14.54: भगवान् श्रीकृष्णका उत्तंकसे अध्यात्मतत्त्वका वर्णन करना तथा दुर्योधनके अपराधको कौरवोंके विनाशका कारण बतलाना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदा गन्धर्वयोनौ वा वर्तामि भृगुनन्दन।
तदा गन्धर्ववत् सर्वमाचरामि न संशय:॥ १८॥
अनुवाद
भृगुवंश को सुख देने वाले महर्षि! जब मैं गंधर्वयोनि में प्रकट होता हूँ, तब मेरे समस्त आचरण और विचार गंधर्वों के समान होते हैं, इसमें संशय नहीं है।
Maharishi who gives happiness to Bhrigu clan! When I appear in Gandharva-yoni, then all my conduct and thoughts are like those of Gandharvas, there is no doubt about it.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥