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mahabharat 14.54.17: हे भृगुपुत्र! जब मैं देवता रूप में अवतार लूँगा, तब देवताओं के समान समस्त रीति-रिवाजों का पालन करूँगा; इसमें कोई संदेह नहीं है॥17॥   |   mahabharat अध्याय 14.54: भगवान‍् श्रीकृष्णका उत्तंकसे अध्यात्मतत्त्वका वर्णन करना तथा दुर्योधनके अपराधको कौरवोंके विनाशका कारण बतलाना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.54.17 
यदा त्वहं देवयोनौ वर्तामि भृगुनन्दन।
तदाहं देववत् सर्वमाचरामि न संशय:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हे भृगुपुत्र! जब मैं देवता रूप में अवतार लूँगा, तब देवताओं के समान समस्त रीति-रिवाजों का पालन करूँगा; इसमें कोई संदेह नहीं है॥17॥
 
O son of Bhrigu! When I take incarnation in the form of a deity, then I will follow all the customs and rituals like the gods; there is no doubt about this. ॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)