श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 53: मार्गमें श्रीकृष्णसे कौरवोंके विनाशकी बात सुनकर उत्तङ्क मुनिका कुपित होना और श्रीकृष्णका उन्हें शान्त करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  14.53.6 
ववर्ष वासवश्चैव तोयं शुचि सुगन्धि च।
दिव्यानि चैव पुष्पाणि पुरत: शार्ङ्गधन्वन:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र श्री कृष्ण के सामने पवित्र एवं सुगन्धित जल एवं दिव्य पुष्पों की वर्षा करते थे ॥6॥
 
Indra used to shower holy and fragrant water and divine flowers in front of Shri Krishna. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)