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श्री महाभारत
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पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
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अध्याय 53: मार्गमें श्रीकृष्णसे कौरवोंके विनाशकी बात सुनकर उत्तङ्क मुनिका कुपित होना और श्रीकृष्णका उन्हें शान्त करना
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श्लोक 23
श्लोक
14.53.23
वासुदेव उवाच
शृणु मे विस्तरेणेदं यद् वक्ष्ये भृगुनन्दन।
गृहाणानुनयं चापि तपस्वी ह्यसि भार्गव॥ २३॥
अनुवाद
श्रीकृष्ण बोले- भृगु नन्दन! मैं जो कह रहा हूँ, उसे विस्तारपूर्वक सुनिए। भार्गव! आप तपस्वी हैं, अतः मेरी प्रार्थना स्वीकार कीजिए॥ 23॥
Shri Krishna said-Bhrigu Nandan! Listen to what I am saying in detail. Bhaargava! You are an ascetic, so please accept my request.॥ 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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