उत्तङ्क उवाच
यस्माच्छक्तेन ते कृष्ण न त्राता: कुरुपुङ्गवा:।
सम्बन्धिन: प्रियास्तस्माच्छप्स्येऽहं त्वामसंशयम्॥ २०॥
अनुवाद
उत्तंक ने कहा - हे कृष्ण! कौरव आपके प्रिय स्वजन थे, फिर भी शक्ति होते हुए भी आपने उनकी रक्षा नहीं की। अतः मैं आपको अवश्य ही शाप देता हूँ।
Uttanka said - Lord Krishna! The Kauravas were your dear relatives, yet despite having the power you did not protect them. Therefore I will surely curse you.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥