श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 53: मार्गमें श्रीकृष्णसे कौरवोंके विनाशकी बात सुनकर उत्तङ्क मुनिका कुपित होना और श्रीकृष्णका उन्हें शान्त करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  14.53.20 
उत्तङ्क उवाच
यस्माच्छक्तेन ते कृष्ण न त्राता: कुरुपुङ्गवा:।
सम्बन्धिन: प्रियास्तस्माच्छप्स्येऽहं त्वामसंशयम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
उत्तंक ने कहा - हे कृष्ण! कौरव आपके प्रिय स्वजन थे, फिर भी शक्ति होते हुए भी आपने उनकी रक्षा नहीं की। अतः मैं आपको अवश्य ही शाप देता हूँ।
 
Uttanka said - Lord Krishna! The Kauravas were your dear relatives, yet despite having the power you did not protect them. Therefore I will surely curse you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)