vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
»
अध्याय 53: मार्गमें श्रीकृष्णसे कौरवोंके विनाशकी बात सुनकर उत्तङ्क मुनिका कुपित होना और श्रीकृष्णका उन्हें शान्त करना
»
श्लोक 19
श्लोक
14.53.19
इत्युक्तवचने कृष्णे भृशं क्रोधसमन्वित:।
उत्तङ्क इत्युवाचैनं रोषादुत्फुल्ललोचन:॥ १९॥
अनुवाद
भगवान श्रीकृष्ण के ऐसा कहते ही उत्तंक मुनि अत्यन्त क्रोधित हो उठे और क्रोध से आँखें फाड़कर देखने लगे। उन्होंने श्रीकृष्ण से ऐसा कहा॥19॥
As soon as Lord Krishna said this, sage Uttanka was very angry and started staring with his eyes wide open in rage. He said this to Krishna.॥ 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×